OCD का प्रभाव क्या है?HealthPlanet

Posted on Fri 2nd Dec 2022 : 10:01

यह एक चिंता करने वाली बीमारी है, जिसमें पीड़ित शख्स किसी बात की जरूरत-से-ज्यादा चिंता करने लगता है। एक ही जैसे अनचाहे ख्याल उसे बार- बार आते हैं और एक ही काम को बार-बार दोहराना चाहता है। ऐसे लोगों को सनक वाले ख्याल आते हैं और अपने बिहेवियर पर कोई कंट्रोल नहीं होता। ऐसे मरीज न खुद को रोक पाते हैं, न ही बेफिक्र रह पाते हैं। जैसे कोर्इ सूर्इ पुराने रेकॉर्ड पर अटक जाती है, वैसे ही ओसीडी से दिमाग किसी एक ख्याल या काम पर अटक जाता है। मसलन, यह कन्फर्म करने के लिए कि गैस बंद है या नहीं, आप 20 बार स्टोव की नॉब चेक करते हैं। तब तक हाथ धोते रहते हैं, जब तक कि वह छिल न जाए या आप तब तक गाड़ी भगाते रहते हैं, जब तक कि आपको यह संतुष्टि न हो जाए कि जिस शख्स ने पीछे से हॉर्न दिया था, वह पीछा तो नहीं कर रहा।

समझें ओसीडी को :-
ऑब्सेशन बिना आपकी चाहत के होता है। इसमें कंट्रोल से बाहर वाले विचार, तस्वीरें और उत्तेजना बार-बार दिमाग में आती रहती है। आप चाहते हैं कि ये ख्याल आपके दिमाग में न आएं, मगर आप इन्हें रोक नहीं पाते। दिक्कत यह है कि ये ख्याल अक्सर निराशाजनक और ध्यान भंग करने वाले होते हैं।कंपल्शन ऐसा बिहेवियर है, जिसे आप बार-बार दोहराने की जरूरत महसूस करते हैं। आमतौर पर कंपल्शन ऑब्सेशन से छुटकारा पाने की कोशिश के तहत किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, अगर आप गंदगी से डरते हैं तो शायद आप बार-बार सफार्इ करने के आदी हो जाएंगे। यानी इससे आपको कोर्इ फायदा महसूस नहीं होता। उलटे ऑब्सेसिव सोच और मजबूती से वापस आती है। ऐसे में कंपल्शन वाला बिहेवियर बेचैनी में बदल जाता है क्योंकि आप ऐसा बार-बार करने लगते हैं और इस पर ज्यादा-से-ज्यादा वक्त लगाने लगते हैं।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author -> Poster Name

Short info